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Organic farming (जैविक खेती) - Hindi (Taj Agro)

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Organic farming (जैविक खेती) - Hindi (Taj Agro)
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जैविक खेती कैसे करें पूरी जानकारी ! How to Make Organic Farming
जैविक खेती देशी खेती का आधुनिक तरीका है| जहां प्रकृति एवं पर्यावरण को संतुलित रखते हुए खेती की जाती है| इसमें रसायनिक खाद कीटनाशकों का उपयोग नहीं कर खेत में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष, फसल चक और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे रॉक फास्फेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषक तत्व दिए जाते हैं| फसल को प्रकृति में उपलब्ध मित्र कीटों, जीवाणुओं और जैविक कीटनाशकों द्वारा हानिकारक कीटों तथा बीमारियों से बचाया जाता है|
जैविक खेती की आवश्यकता
आजादी के समय खाने के लिए अनाज विदेशों से लाया जाता था, खेती से बहुत कम पैदा होता था, किन्तु जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होती गई, अनाज की कमी महसूस होने लगी| फिर हरित क्रान्ति का दौर आया इस दौर में 1966-67 से 1990-91 के बीच भारत में अन्न उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई| अधिक अनाज उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अंधाधुंध उर्वरकों, कीटनाशकों और रसायनों का प्रयोग किया जाने लगा, जिसके कारण भूमि की विषाक्तता भी बढ़ गई| मिट्टी से अनेक उपयोगी जीवाणु नष्ट हो गए और उर्वरा शक्ति भी कम हो गई|

आज संतुलित उर्वरकों की कमी के कारण उत्पादन स्थिर सा हो गया है, अब हरित क्रान्ति के प्रणेता भी स्वीकारने लगे हैं, कि इन रसायनों के अधिक मात्रा में प्रयोग से अनेक प्रकार की वातावरणीय समस्याएं और मानव तथा पशु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न होने लगी हैं एवं मिटटी की उर्वरा शक्ति में कमी होने लगी है, जिसके कारण मिटटी में पोषक तत्वों का असंतुलन हो गया हैं| मिटटी की घटती उर्वरकता के कारण उत्पादकता का स्तर बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक जैविक खादों का प्रयोग आवश्यक हो गया है|

किसान महंगे उर्वरकों और कीटनाशकों को खरीदने से कर्ज में डूब रहे हैं, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति में गिरावट आ रही है| मानव द्वारा रसायनयुक्त खाद्य पदार्थों के प्रयोग से शारीरिक विकलांगता एवं कैंसर जैसी भयंकर बीमारी होने लगी है| इस समस्या के निराकरण के लिए आधुनिक जैविक खेती अवधारणा एक उचित विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई है| चूंकि जैविक कृषि में किसी भी प्रकार के रसायनिक आदानों का प्रयोग वर्जित है तथा फसल उत्पादन के लिए वांछित सभी संसाधन किसानों द्वारा ही जुटाने होते हैं|

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इसलिए किसानों को संसाधनों के उत्पादन, उनका उचित प्रयोग और जैविक खेती प्रबंधन तकनीकी के बारे में प्रशिक्षित करना बहुत आवश्यक है| कुछ अन्य कारण इस प्रकार है, जैसे-
1. कृषि उत्पादन में टिकाऊपन लाया जा सके|
2. मिटटी की जैविक गुणवत्ता बनाए रखी जा सके|
3. प्राकृतिक संसाधनों को बचाया जा सके|
4. वातावरण प्रदूषण को रोका जा सके|
5. मानव स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके|
6. उत्पादन लागत को कम किया जा सके|
पर्यावरण को बिना हानि पहुंचाए खेती और प्राकृतिक संसाधनों को भविष्य के लिए संचित रखते हुए उनका सफल उपयोग करके फसलों के उत्पादन में लगातार वृद्धि करना एवं मानव की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करना ही टिकाऊ खेती कहलाता है|

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जैविक खेती, टिकाऊ खेती का प्रमुख घटक है, जिसका मुख्य उद्देश्य रसायनों का कम से कम उपयोग और उनके स्थान पर जैविक उत्पादों का प्रयोग अधिक से अधिक हो जिससे पर्यावरण संतुलन बना रहे व भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़े| जैविक खेती का मुख्य घटक जैविक खाद, जैव उर्वरक है, जो कि रसायनिक खादों का एक उत्तम विकल्प है|
जैविक खेती के मुख्य घटक
जैविक खाद- जैविक खादों का तात्पर्य कार्बनिक पदार्थों से है, जो कि सड़ने पर कार्बनिक पदार्थ पैदा करते हैं| इसमें मुख्यतः खेती के अवशेष, पशुओं का मलमूत्र आदि होता है| इसमें फसलों के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व कम मात्रा में ही सही, उपस्थित होते है| इनमें मिटटी को सभी पोषक तत्व, जो फसलें अपनी बढ़वार के लिए ले लेती हैं, पुनः प्राप्त हो जाते है| आधुनिक कृषि में खेती की सघन पद्धतियाँ अपनाई जा रही हैं, जिनसे एक ही खेत में लगातार कई फसलें लेने से मिटटी में कार्बनिक पदार्थ की कमी हो जाती है|

जिससे मिटटी की संरचना और उर्वरा शक्ति पर बुरा असर पड़ता है| इसलिए मिटटी कार्बनिक पदार्थ को स्थिर रखने के लिए जैविक खादों का उपयोग अति आवश्यक है| साथ ही साथ जैविक खाद मिटटी की संरचना, वायु, तापमान, जलधारण क्षमता, जीवाणु संख्या तथा उनकी अभिक्रियाओं, बेस विनिमय क्षमता और भूमि कटाव को रोकने पर अच्छा प्रभाव डालती हैं|
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